HimShala के इस लेख में हिमाचल प्रदेश के सभी प्रमुख मेले और त्योहारों के बारे में जानकारी दी गयी है । यह लेख हिमाचल प्रदेश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है क्यूंकि मेलों और त्योहारों से सम्बधित कोई न कोई प्रश्न हर परीक्षा में पूछा जाता रहा है। उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए लाभकारी होगी ।
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Festivals of Himachal Pradesh
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मेले और त्योहार इस प्रकार हैं :
लवी मेला
- लवी मेला हिमाचल प्रदेश का सबसे पुराना व्यापारिक मेला है ।
- लवी मेला शिमला के रामपुर बुशहर में मनाया जाता है और यह राज्य स्तर का मेला है ।
- लवी मेला हर वर्ष नवंबर महीने में मनाया जाता है ।इस मेले का आरंभ राजा केहरी सिंह ने किया था ।
लोसर (Festival)
- लोसर उत्सव हिमाचल प्रदेश के सभी तिब्बती इलाकों में मनाया जाता है ।
- लोसर तिब्बती नववर्ष के आगमन में हर वर्ष फरबरी महीने के अंतिम सप्ताह में मनाया जाता है ।
- लोसर उत्सव को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है ।
- याक और CHAM नृत्य (मुखौटा लगाकर नृत्य करना ) इसका मुख्य आकर्षण हैं ।
मिंजर मेला
- मिंजर का अर्थ है :"मक्का का फूल " ।
- मिंजर मेला हिमाचल राष्ट्रीय स्तर का मेला है।
- मिंजर मेला सावन महीने में एक सप्ताह तक मनाया जाता है।
- इसका आयोजन चौगान (चंबा) में किया जाता है ।
- मिंजर मेले में बारिश के देवता "वरुण" की पूजा की जाती है तथा उनके लिए मक्का का फूल, नारियल, सिक्के,फल आदि रावी नदी में अर्पित किये जाते हैं ।
- मिंजर मेले का आरंभ राजा साहिल वर्मन के काल में हुआ था ।
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फुलेच (Festival)
- फुलेच त्योहार सितंबर महीने में आयोजित होता है ।
- फुलेच उत्सव हिमाचल के किन्नौर का जिला स्तरीय उत्सव है ।
- फुलेच को 'FESTIVAL OF FLOWERS' भी कहते हैं यह त्योहार ब्रह्मकमल नाम के एक फूल से सम्बधित है ।
- फुलेच उत्सव में पूर्वजों की पूजा की जाती है ।
बैशाखी (Festival)
- हिमाचल प्रदेश में भी बैशाखी बसंत ऋतु में प्रति वर्ष 13 अप्रैल को मनाई जाती है ।
- बैशाखी को शिमला में विशु , किन्नौर में बीस , बिलासपुर-कांगड़ा - हमीरपुर में बिसोवा, और चंबा में लिसू कहते हैं।
- बैशाखी का संबध रबी फसल से है ।
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कुल्लू दशहरा
- कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश का अंतराष्ट्रीय स्तर का मेला है ।
- यह विजयदसवीं के दिन आरंभ होता है तथा 7 दिनों तक चलता है ।
- कुल्लू दशहरा का मेला कुल्लू के ढालपुर मैदान में लगता है ।
- यह मेला कुल्लू के राजा जगत सिंह द्वारा 1651 ई में आरंभ कराया गया था ।
- कुल्लू दशहरा का संबध भगवान रघुनाथ से है ।
मंडी शिवरात्री
- मंडी का शिवरात्री मेला हिमाचल का अंतराष्ट्रीय स्तर का मेला है ।
- शिवरात्री मेले का आयोजन मंडी के पड्डल मैदान में किया जाता है ।
- शिवरात्री मेला एक सप्ताह तक चलता है , तथा हर वर्ष फरवरी में मनाया जाता है ।
- 1648 में मंडी के राजा अजबर सेन द्वारा शिवरात्री मेले को आरंभ किया था ।
रेणुका मेला
- रेणुका मेला सिरमौर में मनाया जाने वाले अंतराष्ट्रीय स्तर का मेला है ।
- रेणुका मेला दिवाली के 10 दिन बाद आरंभ होता है तथा 6 दिन तक चलता है ।
- यह मेला परशुराम के माता रेणुका की याद में मनाया जाता है ।
- रेणुका मेले के आरंभ में परशुराम के मलाणा स्थित मदिर से परशुराम की मूर्ति को लाकर रेणुका झील के पास रखा जाता है ,तथा इस मेले का समापन परशुराम की मूर्ति को दोबारा वापिस ले जाकर किया जाता है ।
सैरी/ सैर (Festival)
- सैर त्योहार मुख्यतः शिमला, मंडी, कुल्लू,सोलन में मनाया जाता है ।
- सैर उत्सव सितंबर महीने में मनाया जाता है ।
- यह त्योहार वर्षा ऋतु की समाप्ति और खरीफ फसल के पकने के अवसर पर मनाया जाता है ।
चातर / ढोलरु
- इसे कुल्लू में चतराली और चंबा में ढोलरु कहा जाता है ।
- इसे चैत्र महीने में मनाया जाता है,
- ढोलरु और चिंग लोकगीत इस त्योहार से सम्बधित हैं ।
दिवाली
- हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में दिवाली को खोजाला भी कहते हैं तथा इसे जनवरी महीने में मनाया जाता है।
- मंडी में दिवाली की रात को घास के गोले को जलाते हुए घुमाने की प्रथा है ।
- हिमाचल प्रदेश में दिवाली को 'दीपाली', 'धाली', 'बोरी', 'दियाली' आदि नामों से जाना जाता है ।
होली मेला
- होली मेला हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के सुजानपुर मैदान में हर वर्ष मार्च महीने में मनाया जाता है।
- सुजानपुर के होली मेले को हिमाचल का राज्य स्तरीय मेले के रूप में ख्याति प्राप्त है ।
तारा देवी मेला
- तारा देवी मेला हर वर्ष आश्विन के नवरात्रों की अष्ठमी को मनाया जाता है ।
- तारा देवी मेला शिमला के तारा देवी मंदिर में लगता है ।
पत्थर का खेल मेला
- पत्थर का खेल मेला हिमाचल के शिमला जिले के हलोग में मनाया जाता है ।
- यह मेला प्रतिवर्ष अक्टूबर-नवंबर में मनाया जाता है ।
- इस मेले में लोग खुद को दो समूहों में विभाजित करते हैं तथा एक दूसरे की तरफ पत्थर फेंकते हैं ।
चिंतपूर्णी मेला
- चिंतपूर्णी मेला हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में मनाया जाता है ।
- इसे माता का मेला के नाम से भी जाना जाता है ।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ पर माता सती के चरण पड़े थे ।
भुण्डा (Festival)
- इस त्यौहार को मुख्यतः हिमाचल प्रदेश के कुल्लू , मंडी और शिमला में मनाया जाता है ।
- इसे भुण्डा, भोज, शान्द आदि नामों से जाना जाता है ।
- इस त्योहार का सम्बध परशुराम से है ।
- इसे प्रत्येक 12 वर्ष में एक बार मनाया जाता है ।
नवाला (Festival)
- नवाला त्योहार हिमाचल के कुल्लू , मंडी, चंबा की गद्दी जनजाति के लोगों द्वारा मनाया जाता है ।
- नवाला उत्सव शिव को समर्पित है ।
पूरग मेला
- पूरग मेला हिमाचल में शिमला जिले के कोटखाई में मनाया जाता है ।
- यह मेला महादेव की श्रद्धा में हर वेश अप्रैल माह में मनाया जाता है ।
जागरा (Festival)
- जागरा त्योहार अगस्त - सितंबर माह में मनाया जाता है ।
- जागरा त्योहार मुख्यतः शिमला, किन्नौर, सिरमौर में मनाया जाता है ।
- जागरा महासू देवता से सम्बधित है इसमें महासू देवता की याद में बीसू गीत गाये जाते हैं।
डूंगरी मेला
- डूंगरी मेला मई महीने में मनाया जाता है ।
- यह कुल्लू और मनाली में मनाया जाता है ।
- डूंगरी मेला भीम की पत्नी हिडिम्बा को समर्पित है ।
जवाला मुखी मेला
- ज्वालामुखी मेला हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में ज्वालामुखी मंदिर में लगता है ।
- यह मेला वर्ष में 2 बार नवरात्रों में लगता है ।
नलबाड़ी मेला
- नलबाड़ी मेले को पशु मेला भी कहा जाता है , इसमें बैलों को पूजा जाता है ।
- नलबाड़ी मेला हिमाचल प्रदेश का राज्य स्तरीय मेला है जो बिलासपुर जिले में मनाया जाता है ।
- यह मेला मार्च महीने में आयोजित किया जाता है ।
- नलबाड़ी मेला गोबिंद सागर झील के पास लहुनु नामक मैदान में लगता है ।
डल मेला
- डल मेला हिमाचल के काँगड़ा के धर्मशाला में मनाया जाता है ।
- डल मेला श्रावण महीने में जुलाई - अगस्त के बीच मनाया जाता है ।
शूलनी मेला
- शूलनी मेला हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले का राज्य स्तरीय मेला है ।
- यह मेला प्रतिवर्ष जून महीने में आयोजित किया जाता है ।
- शूलनी मेला माता सलोनी देवी की स्मृति में आयोजित किया जाता है ।
सारही मेला
- सारही मेला हिमाचल के सोलन जिला के अर्की में मनाया जाता है ।
- यह मेला जुलाई माह में आयोजित होता है ।
- सारही मेला बैलों की लड़ाई के लिए प्रसिद्ध है ।
ग्रीष्मोत्सव
- ग्रीष्मोत्सव हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला का राष्ट्रीय मेला है ।
- ग्रीष्मोत्सव हर साल मई महीने में मनाया जाता है ।
जोहड़ जी मेला
- जोहड़ जी मेला हिमाचल प्रदेश के सोलन में कसौली नामक स्थान में मनाया जाने वाला जिला स्तरीय मेला है ।
- कहा जाता है कि गुरु नानकदेव जी द्वारा एक नरभक्षी को तेल के कढाये में डुबोकर मारा गया था। इस स्मृति में यह मेला लगाया जाता है ।
- जोहड़ जी मेला साम्प्रदायिक एकता का प्रतीक है ।
पीपलू मेला
- पीपलू मेला हिमाचल के ऊना जिला का प्रमुख मेला है ।
- यह मेला ज्येष्ठ में मई-जून माह में आयोजित होता है ।
त्रिलोकपुर मेला
- यह मेला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में त्रिलोकपुर नामक स्थान पर मनाया जाता है ।
- त्रिलोकपुर मेले में माता बाला सुन्दरी को पूजा जाता है ।
- त्रिलोकपुर मेला वर्ष में 2 बार नवरात्रों में आयोजित होता है ।
गोची ( Festival)
- गोची festival हिमाचल के लाहौल स्पीति जिले के केलांग में मनाया जाता है ।
- यह उत्सव हर वर्ष फरवरी माह में आयोजित होता है ।
- गोची उत्सव उन परिवारों द्वारा मनाया जाता है, जिन्हें पिछले वर्ष पुत्र की प्राप्ति हुई हो ।
हालदा (Festival)
- हालदा उत्सव हिमाचल प्रदेश में चंद्रभागा घाटी में मनाया जाता है ।
- यह उत्सव/मेला पौष माह (जनवरी) की पूर्णिमा को मनाया जाता है ।
- इस उत्सव में गांव के सभी लोग मशालें जलाकर एकत्रित होते हैं।
मणिमहेश मेला
- मणिमहेश मेला हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले का राज्य स्तरीय मेला है ।
- यह मेला अगस्त (भाद्रपद) महीने में कृष्ण जन्माष्टमी से प्रारंभ होता है ।
- इस मेले में मणिमहेश यात्रा निकाली जाती है जो लक्ष्मीनारायण मंदिर से आरंभ होती है ।
सूही मेला
- सूही मेला हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में मनाया जाता है ।
- यह मेला हर वर्ष अप्रैल महीने में लगता है ।
- सूही मेला चंबा की रानी और राजा साहिलवर्मन की पत्नी सुनैना देवी के बलिदान की याद में मनाया जाता है ।
चेरवाल मेला / उत्सव
- चेरवाल मेला भाद्रपद महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है ।
- इस त्योहार को हिमाचल ले कुल्लू में मदरांजो और चंबा में पथेडू कहा जाता है ।
- चेरवाल उत्सव को 'पृथ्वी की पूजा' भी कहा जाता है ।
हरयाली (festival)
- हरयाली उत्सव सावन महीने के पहले दिन मनाया जाता है ।
- हरयाली उत्सव को हिमाचल प्रदेश के उपरी शिमला में रहयाली , काँगड़ा में हरियाली, किनौर में दखरैन और लाहौल स्पीति में शैगतेरम कहा जाता है ।
- हरयाली उत्सव के अवसर पर कृषि से सम्बधित कोई भी काम नही किया जाता है ।
छतराडी मेला
- छतराडी मेला हिमाचल प्रदेश के चंबा का जिला स्तरीय मेला है ।
- यह मेला सितंबर महीने में मनाया जाता है ।
- छतराडी मेले में केवल महिलाओं और बच्चों को ही भाग लेने की अनुमति होती है ।
हिमाचल प्रदेश का प्रमुख त्योहार क्या है ?
हिमाचल प्रदेश के कुछ प्रमुख त्योहार इस प्रकार हैं : लवी मेला, कुल्लू दशहरा, मंडी शिवरात्री, ग्रीष्मोत्सव, नलबाड़ी मेला, जागरा, होली मेला, रेणुका मेला, मिंजर मेला, फुलेच आदि ।
हिमाचल प्रदेश के किस त्योहार को फूलों का त्योहार कहा जाता है ?
फुलेच त्योहार, जो की हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मनाया जाता है , को फूलों का त्योहार कहा जहा है ।
एक पर्यटक के रूप में हिमाचल प्रदेश के किन मेलों में अवश्य शामिल होना चाहिए ?
हिमाचल प्रदेश में कुल्लू का दशहरा, शिमला का ग्रीष्मोत्सव, मंडी का शिवरात्री मेला, सुजानपुर का होली मेला, सिरमौर का रेणुका मेला आदि कुछ ऐसे मेले हैं, जो पर्यटन को आकर्षित करते हैं ।
