भारत में लोगों, जानवरों तथा पारितंत्र जीवन में नदियां बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हिंदू धर्म में भारत में बहने वाली नदियों का एक उत्कृष्ट स्थान है ।इन नदियों को देश के सभी नागरिकों चाहे वे किसी भी धर्म जाति या समुदाय से संबंध रखते हैं, सभी के द्वारा पवित्र माना जाता है। नदियां मनुष्य जीवन में अहम भूमिका अदा करती है ।इस लेख में हम आपको भारत की पवित्र नदियों में से एक व्यास नदी (Beas River) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाने जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि आपके लिए जानकारी सहायक सिद्ध होगी।
ब्यास नदी (Beas River)
ब्यास नदी भारत के पंजाब राज्य तथा हिमाचल प्रदेश की प्रमुख नदी है। ब्यास नदी की लंबाई 470 किलोमीटर है। हिमाचल प्रदेश में ब्यास नदी की लंबाई 260 किलोमीटर है। ब्यास नदी का वैदिक नाम अर्जिकिया किया है तथा इसे संस्कृत भाषा में बिपाशा नाम से पुकारते हैं। बिपाशा नाम से पहले ब्यास नदी का सरस्वती नाम भी था । पंजाब राज्य में बहने वाली प्रमुख पांच नदियों में से एक ब्यास नदी भी है। वेदों में ब्यास नदी का उल्लेख हुआ है। ऋग्वेद के अंदर इसका उल्लेख एक बार हुआ है। इस नदी का व्यास नाम महर्षि ब्यास के नाम पर रखा गया है
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व्यास नदी का उद्गम तथा प्रवाह /बहाव
व्यास नदी (Beas River) का उद्गम मुख्यतः व्यास कुंड से हुआ है। व्यास कुंड हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में 13050 फीट (4361 m) ऊंचाई पर स्थित है .रोहतांग दर्रे जो पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत आता है, व्यास कुंड वहीं पर स्थित है ।
ब्यास नदी के जल का प्रवाह कुल्लू से मंडी होता हुआ हमीरपुर से कांगड़ा में बहता हुआ कांगड़ा से सीधे पंजाब में प्रवेश कर जाता है। अन्य शब्दों में कहें तो कुल्लू से व्यास नदी का पानी दक्षिण दिशा की ओर बहता है, तथा बीच रास्ते में मिलने वाली सभी सहायक नदियों को अपने ने मिलाता हुआ पश्चिम दिशा में मंडी से कांगड़ा घाटी की ओर बहता जाता है, तथा दक्षिण पश्चिम दिशा में अपनी संपूर्ण यात्रा पूरी करने के पश्चात आर्की में सतलुज नदी में मिल जाता है, और फिर भारत से पाकिस्तान की ओर व्यास नदी निकल जाती है।
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व्यास नदी (Beas River) पर बनी परियोजनाएँ
पोंग बांध
पोंग बांध सन 1975 में बनकर तैयार किया गया यह बांध हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित हैं। कांगड़ा जिला शिवालिक पहाड़ियों के अंतर्गत आता है। पोंग बांध को और नाम भी प्रदान किए गए। जैसे:-
- 1975 में इस बांध को महाराणा प्रताप सागर नाम दिया गया।
- 1983 में जीव अभ्यारण घोषित किया गया।
- 1994 में इसे राष्ट्रीय महत्व की आद्रभूमि भी घोषित किया गया।
- 2002 में इसे रामसर स्थल घोषित किया गया।
- पौंग जलाशय के अंदर मछलियों को पाला जाता है।इसलिए यह हिमालय की तलहटी में सबसे महत्वपूर्ण मछली जलाशय है। इसमें अन्य दुर्लभ मछलियां जैसे सेल और गैड भी पाली जाती हैं। इस जलाशय में महाशीर मछली अधिक पाई जाती हैं, तथा मध्य प्रदेश राज्य की राज्य मछली महाशीर मछली है।
पंडोह बांध
पंडोह डैम व्यास नदी (Beas River) के किनारे बना है। यह बांध सन् 1977 में बना था। इसका मुख्य उद्देश्य ग्लेशियरों से पिघल कर आने वाले पानी को स्टोर करके पनबिजली बनाना है। इस बांध से बनी बिजली परियोजना 'रन ऑफ रिवर' योजना का हिस्सा है। पंडोह झील चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे 21 के अंतर्गत पड़ती है। पंडोह झील पंडोह डैम द्वारा ही बनी हैं।
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व्यास नदी की सहायक नदियाँ
ब्यास नदी (Beas River) की सबसे बड़ी सहायक नदी पार्वती नदी है ,तथा अन्य बारहमासी सहायक नदियां नीचे बताई गई हैं
- कुल्लू जिले में- पार्वती , मलाणा, हुरला सैंज तथा तीर्थन।
- मंडी जिले में - ऊहल, लूणी , रान ,बीनू, हंसा, बाखली, सुकेती , रानोड़ी
- कांगड़ा जिले में - बिनवा , योगल , वाणगंगा, डेहर, चक्की।
व्यास नदी की सहायक खड्डे
- बकर खड्ड
- सोन खड्ड
- मान खड्ड
- कुणाह खड्ड
- सरवरी खड्ड
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ब्यास नदी के किनारे बसे प्रमुख पर्यटन स्थल
कुल्लू
देवताओं की प्रसिद्ध घाटी कुल्लू घाटी है कुल्लू घाटी एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है जहां दूर-दूर से पर्यटक घूमने तथा नजारे देखने आते हैं ऊंची ऊंची पहाड़ियां नदियां झरने कुल्लू घाटी की शोभा बढ़ाते हैं। कुल्लू की प्रसिद्ध नदियां व्यास तथा सतलुज नदी है। देश का प्रसिद्ध त्योहार दशहरा कुल्लू में मनाया जाता है।
हमीरपुर
प्रदेश के हमीरपुर जिला 1 सितंबर 1972 में गठित हुआ हमीरपुर जिले की स्थापना हमीर चंद द्वारा की गई हमीरपुर जिले का क्षेत्रफल 1118 वर्ग किलोमीटर है।
मनाली
हिमाचल प्रदेश की सबसे खूबसूरत पहाड़ी इलाके में से मनाली को एक माना जाता है। मनाली में पढ़ने वाली बर्फ एक सौंदर्य भरा रूप दिखाती हैं। मनाली में प्रसिद्ध दर्रे, व्यास कुंड, हिडिंबा देवी का मंदिर ,अर्जुन गुफा, सोलंग घाटी इत्यादि प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।
कांगड़ा
हिमालय की गोद में कांगड़ा जिला एक बहुत ही अच्छा पर्यटक स्थल है यहां पर मुख्य ब्रजेश्वरी मंदिर,कांगड़ा का किला, महाराणा प्रताप सागर झील, कांगड़ा आर्ट गैलरी ,मसरूर मंदिर, करेरी झील, चिन्मय तपोवन इत्यादि। जिले में हिमाचल देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा है।
मंडी
मंडी जिले को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। मंडी जिले का प्रमुख पर्यटक स्थल रिवालसर झील, लोकनाथ शिव मंदिर, भूतनाथ मंदिर ,श्यामा काली मंदिर, अर्धनारीश्वर मंदिर, तत्तापानी, शिकारी देवी मंदिर ,कमरूनाग, पराशर। भंतुर हवाई अड्डा मंडी का निकटतम हवाई अड्डा है।
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ब्यास नदी के कुछ मुख्य तथ्य
- पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश में बहने वाली ब्यास नदी को देश की प्रथम 'बी क्लास' नदी का खिताब मिला है।' बी क्लास 'का क्या मतलब होता है कि नदी के पानी का प्रयोग घरेलू कार्य हेतु किया जा सकता है। अर्थात् जल नहाने तथा पीने योग्य हो चुका है, तथा इसका प्रयोग छानकर किया जा सकता है।
- व्यास नदी का मुख्य विवाद रावी तथा ब्यास नदी जल विवाद है। तथा यह दो राज्यों में पंजाब तथा हरियाणा के बीच काफी लंबे समय से हो रहा है। अभी तक इसका कोई तोड़ नहीं निकला है।
- हिमाचल प्रदेश की दूसरी सबसे लंबी नदी ब्यास नदी (Beas River) है।
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ब्यास नदी के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ब्यास नदी की सहायक नदियाँ कौन-कौन हैं?
ब्यास नदी (Beas River) की सबसे बड़ी सहायक नदी पार्वती नदी है । इसके अतिरिक्त मलाणा, तीर्थन , ऊहल, लूणी , रान ,बीनू, हंसा, बिनवा , योगल , बकर खड्ड, सोन खड्ड, मान खड्ड, कुणाह खड्ड, सरवरी खड्ड , वाणगंगा आदि ब्यास की सहायक नदियाँ व खड्डें हैं ।
ब्यास नदी का प्राचीन नाम क्या है ?
ब्यास नदी के प्राचीन नाम अर्जिकिया तथा बिपाशा हैं ।
ब्यास नदी का उद्गम कहाँ से होता है ?
व्यास नदी (Beas River) का उद्गम मुख्यतः व्यास कुंड से होता है जो हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित है ।
ब्यास नदी की कुल लम्बाई कितनी है ?
ब्यास नदी की कुल लम्बाई 470 किलोमीटर है ।
ब्यास नदी की हिमाचल प्रदेश में कुल लम्बाई कितनी है ?
ब्यास नदी की हिमाचल प्रदेश में कुल लम्बाई 260 किलोमीटर के लगभग है ।
ब्यास नदी का वैदिक नाम और संस्कृत नाम क्या था ?
ब्यास नदी का वैदिक नाम अर्जिकिया और संस्कृत नाम बिपासा था ।
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Beas River GK Test
ब्यास नदी से सम्बधित MCQ प्रश्नों को हल करें :
