Himshala के इस लेख में हिमाचल प्रदेश के सभी प्रमुख झीलों का बारे में जानकारी है यह लेख हिमाचल प्रदेश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है क्यूंकि झीलों से सम्बधित कोई न कोई प्रश्न हर परीक्षा में पूछा जाता रहा है। उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए लाभकारी होगी ।
हिमाचल प्रदेश की प्रमुख झीलें इस प्रकार हैं :
गोविंद सागर झील
- गोविंद सागर झील सतलुज नदी पर बनी हुई एक कृत्रिम झील है । यह हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है।
- सतलुज नदी पर भाखड़ा बांध बनने की वजह से बिलासपुर जिले में गोबिन्द सागर नामक झील का निर्माण हुआ है।
- सिखों के 10वें गुरू श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी के आदर में इस झील का नाम गोबिन्द सागर पड़ा है।
- यह जल क्रीड़ा और मछली पकड़ने के लिए प्रसिद्ध है।
- गोविंद सागर झील स्लप्पर और भाखड़ा गांव के बीच स्थित है।
- गोविंद सागर झील का क्षेत्रफल 168 वर्ग किमी है।
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| Lakes in Himachal Pradesh |
खज्जियार झील
- डलहौजी से 24 किमी दूर है।
- चम्बा जिले का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।
- 'मिनी स्विट्जरलैंड' खज्जियार झील का दूसरा नाम है।
- 'खज्जियार नाग' को समर्पित एक मंदिर है खज्जियार झील के निकट ही खज्जियार नाग का एक प्रसिद्ध मंदिर है।
- 7 जुलाई 1992 को स्विस दूत विली पी. ब्लेज़र द्वारा इसे मिनी स्विटज़रलैंड का नाम दिया तथा झील को विश्व मानचित्र पर रखा गया।
- यह क्षेत्र 1951 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- विश्व में स्विट्जरलैंड के जैसे स्थानों का नाम इसके नाम पर रखा गया है। इसलिए खज्जियार को मिनी स्विटजरलैंड के नाम से जाना जाने लगा तथा यह दुनिया का 160वां पर्यटन स्थल बन गया।
घडासरु झील
- 3505 की ऊंचाई पर स्थित है।
- यह झील चंबा के चुराह तहसील में स्थित है।
लामा डल झील
- यह झील सात झीलों का समूह है।
- इनमें से बड़ी झील 3962 मीटर (13200 फीट) की ऊंचाई पर स्थित लामा डल झील है।
- गद्दी लोग जन्माष्टमी पर झील का भ्रमण करते हैं।
मणिमहेश झील
- मणिमहेश झील भरमौर से 35 किलोमीटर दूर स्थित है।
- झील कैलाश पर्वत 5,660 मीटर की तलहटी में समुद्र तल से 3950 मीटर ऊपर है।
- झील में हर साल अगस्त या सितंबर के माह में मेला लगा करते हैं।
चंद्रकुप झील
- यह झील 3450 की ऊंचाई पर स्थित है।
- यह झील चंबा से धर्मशाला की ओर है
- इसके पहाड़ी ज्यादातर समय बर्फ इसे ढके रहती है।
डल झील
- यह झील कांगड़ा जिले में स्थित है।
- यह झील पहाड़ों और देवदार के वृक्षों के बीच स्थित है।
- 'राधाष्टमी' यही मनाई जाती है।
- इसे 'भागसुनाग झील' के नाम से भी जाना जाता है।
- यह 1775 की ऊंचाई पर स्थित है।
करेरी झील
- धर्मशाला से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।
- झील की 1,810 की ऊंचाई है।
- झील का पानी लयुन नदी में गिरता है।
मछियाल झील
- झील काँगड़ा जिला का ममता गांव में स्थित है।
देहनासर झील
- यह झील एक मीठे पानी की झील है।
- देहनासर झील कांगड़ा जिले में बरोट घाटी में स्थित है।
- यह झील देवी पार्वती का घर है।
- जिनके बारे में कहा जाता है कि वे हिंदू कैलेंडर के भाद्रपद महीने में झील की यात्रा करती हैं।
रिवालसर झील
- मंडी से यह झील यह लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित है।
- समुद्रतल से 1360 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- इस झील के पास ही गुरु पद्मसम्भव द्वारा स्थापित 'मानी-पानी' नामक बौद्ध मठ और एक गुरुद्वारा भी स्थित है |
कुमारवाह झील
- यह झील मंडी जिले से 40 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।
- मंडी जिले की चचियोत तहसील से यह 3150 मी. उंचाई पर स्थित है।
- इस झील पर वार्षिक मेला भी लगता है।
कुंत भाग्य झील
- यह झील रिवालसर शहर की पहाड़ी की चोटी पर 1700 मी. की ऊंचाई पर स्थित है।
- यह दो तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
- इस झील की गहराई करीब 12 से 15 मीटर की है।
कलासर झील
- कालासर झील रिवालसर शहर की चोटी पर 1755 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- यह सुंदर हरी पहाड़ियों से घिरा हुआ है और सर्दियों के दौरान बर्फबारी का अनुभव करता है।
पराशर झील
- यह झील मंडी जिले से 30 किमी दूरी पर स्थित है। यह समुद्र तल से 2743 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- यहां शिवालय तीन मंजिला मंदिर है।
- पश्चिमी हिमालय में कोई अन्य मंदिर पराशर ऋषि की स्थापना की भव्यता का मुकाबला नहीं कर सकता।
- यहां पर हर वर्ष जून के माह में मेला लगता है।
- जहां आसपास के सभी गांवों से लोग इकट्ठा होते हैं।
चंद्रनहन झील
- यह झील हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला की रोहड़ू तहसील में 'चंशाल चोटी' पर 4,267 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- पब्बर नदी का उद्गम यहीं से होता है।
तनु जुब्बल झील
- नारकंडा के पास शिमला जिले की दूसरी झील है।
कराली झील
- झील शाली चोटी के ठीक दूसरी ओर छोटा शाली पहाड़ी पर स्थित है।
- इस झील का आकार लगभग शिमला के अन्नाडेल मैदान के आकार के बराबर है।
भृगु झील
- यह झील रोहतांग दर्रे के पास समुद्र तल से ऊपर 4235 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस झील की गहराई लगभग 3mt है।
- इस झील की पवित्रता के कारण कुल्लू, मंडी और लाहौल घाटी के लोग इस झील को देखने आते हैं।
सर्वलसर झील
- यह झील कुल्लू जिले में स्थित है।
- यह झील 3100 मीटर की ऊंचाई पर 'जालोरी पास' के शीर्ष पर स्थित है।
- यह बंजार से अन्नी की ओर 20 किमी दूर है
नाको झील
- यह एक ऊंचाई वाली झील है।
- जो किन्नौर जिले के पूह उपमंडल में स्थित है।
- ताशीगंग नामक एक गाँव है जिसके चारों ओर कई गुफाएँ हैं जहाँ यह माना जाता है कि गुरु पद्मसंभव ने ध्यान किया और अनुयायियों को प्रवचन दिया।
शोरंग झील
- शोरंग झील किन्नौर जिले में स्थित है।
रेणुका झील
- नाहन से लगभग 45 कि.मी दूरी पर स्थित है।रेणुका झील ददाहू के पास सबसे बड़ी प्राकृतिक अंडाकार झील है।
- विश्व की प्राकृतिक झीलों की गिनती में रेणुका झील १३ नंबर पर है
- यह झील एक सो रही औरत के आकार की है।इस झील की स्थापना तब हुई थी जब माता रेणुका को उनके पुत्र परशुराम ने अपने पिता, ऋषि जमदग्नि की आज्ञाकारिता में बलिदान किया था।
- इस झील में आश्रय एक वन्य जीवन अभयारण्य है जहां पर हिरण की प्रजातियां, जल पक्षी, लाल जंगली मुर्गी, काला तीतर, सिंह, भालू और बड़ी संख्या में सांभर, चीतल और मोर आदि पाए जाते हैं।
साकेती झील
- यह झील सिरमौर जिले में शिवालिक जीवाश्म पार्क के पास स्थित है।
- यह एक समय में एक झील थी लेकिन अब यह पास की पहाड़ियों से रेत और पत्थरों से भर गई है।
- झील से रेत और पत्थरों को हटाकर, इसकी बाहरी दीवारों को विकसित करके, अवांछित सामग्री के प्रवाह को रोकने के लिए झील को एक अच्छे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
सूरज ताल झील
- यह झील लाहौल-स्पीति जिले में स्थित है।
- यह झील 4800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- यह झील बारालाचा के सामने 1200x1600 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थित है।
चंद्र ताल
- चंद्र ताल झील समुद्र टापू पठार पर स्थित है, जो लाहुल और स्पीति जिले के स्पीति भाग में चंद्रा नदी को देखती है।
- झील भारत के दो ऊंचाई वाले आर्द्रभूमि में से एक है जिसे रामसर स्थलों के रूप में बनाया गया है।
पोंग डैम या महाराणा प्रताप सागर
- पोंग बांध सन 1975 में बनकर तैयार किया गया यह बांध हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित हैं। कांगड़ा जिला शिवालिक पहाड़ियों के अंतर्गत आता है। पोंग बांध को और नाम भी प्रदान किए गए। जैसे:-
- 1975 में इस बांध को महाराणा प्रताप सागर नाम दिया गया।
- 1983 में जीव अभ्यारण घोषित किया गया।
- 1994 में इसे राष्ट्रीय महत्व की आद्रभूमि भी घोषित किया गया।
- 2002 में इसे रामसर स्थल घोषित किया गया।
- पौंग जलाशय के अंदर मछलियों को पाला जाता है।इसलिए यह हिमालय की तलहटी में सबसे महत्वपूर्ण मछली जलाशय है। इसमें अन्य दुर्लभ मछलियां जैसे सेल और गैड भी पाली जाती हैं। इस जलाशय में महाशीर मछली अधिक पाई जाती हैं, तथा मध्य प्रदेश राज्य की राज्य मछली महाशीर मछली है।
पंडोह झील
- पंडोह झील मंडी-कुल्लू NH21 पर मंडी से ऑट की ओर 14 किमी दूरी पर है।
- झील के पानी को डायवर्ट कर पंडोह बांध के निर्माण के कारण झील का निर्माण हुआ है।
- 12 किमी खुले चैनल के साथ पहाड़ियों के नीचे 13 किमी की दो लंबी सुरंगों द्वारा पानी ले जाया जा रहा है।
चमेरा झील
- यह झील जिला चंबा के गांव चमेरा के पास रावी नदी पर 540 मेगावाट की चमेरा जलविद्युत परियोजना के निर्माण के कारण बनी है।
- यह डलहौजी से 25 किमी की दूरी पर स्थित है।
- चमेरा बांध को जोड़ने वाली सड़क झील के किनारे 'भाली मंदिर' और भंडाल घाटी के प्रसिद्ध घने जंगल तक जाती है।
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